वैदिक यात्रा की संचार प्रौद्योगिकी में आपका स्वागत है।

आइये शास्त्र निर्देशन में की जाने वाली अपने चरम लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु एक मंगलमय यात्रा, जिसे वैदिक यात्रा का नाम दिया गया हैं । यह कोई नई यात्रा नहीं है, पर; किन्हीं कारणों से विस्मरण हुई प्राचीन पथ के स्मरण की एक दिव्य यात्रा हैं। वैदिक यात्रा मानव मात्र के लिए एक अति सरलतम यात्रा हैं। यह प्रकृति के साथ मधुर सम्बन्ध रखते हुए जगन्नियन्ता की वाणी हमारे आर्ष ग्रंथों के दिशा निर्देशानुसार जीवन जीने का एक सत्प्रयास है। इस यात्रा में किसी धर्म या संप्रदाय विशेष से जोड़ने का दुराग्रह भी नही है । विश्व की प्राचीनतम सनातन वैदिक आर्य सभ्यता की जीवनशैली को आधुनिक परिप्रेक्ष में जीने की सदिच्छा का एक प्रयोग मात्र हैं। इसमें हानि की अणुमात्र भी संभावना नहीं हैं। इस पद्धति के स्वीकारने से यदि कुछ परिवारों में भी समरसता का संचार हो जाए तो आज के अस्तव्यस्त जीवन शैली के लिये एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। इस जीवन शैली को नये कलेवर में उपस्थापित किया है श्रीमद्भागवत के प्रखर प्रवक्ता शास्त्रानुशीलन प्रेमी, प्रयोगवादी, भागवतकिंकर श्री अनुराग कृष्ण शास्त्री "कन्हैया जी" ने।

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अध्यात्मिक गतिविधियाँ

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सत्संग अनुसूची

सुविचार

  • हमें जीवन की प्रत्येक घटना से कोई ना कोई सकारात्मक सीख अवश्य लेनी चाहिए।

  • जीवन रूपी वृक्ष में विनम्रता ही वह फल है, जो अभिमान रूपी डाल को झुकाये रखता है।

  • सद्गुरु वास्तविक माध्यम है, वास्तविक मंज़िल ईश्वर है।

  • मुक्ति देने के बाद भगवान् मुक्त हो जाते हैं,
    परन्तु भक्ति देने के बाद भगवान बंधन में आ जाते हैं।

  • जीवन की सार्थकता ही जीवन की सरलता में है।

  • जिसके जीवन में झुकना नहीं हैं,
    उसके जीवन में टूटना निश्चित हैं।

  • मृत्यु की याद ही संसार से वैराग्य और भगवान् से अनुराग उत्पन्न करती हैं।

  • जिंदगी में इंसान की सबसे बेहतरीन पहचान उसकी अपनी मुस्कुराहट है।

  • जिस कार्य के लिए अपनी आत्मा भीतर से टोक दे, उसे आगे बढ़ाने से पहले ही रोक देना चाहिये।

  • विश्वास रखो कि ईश्वर ही हमारे परम हितैषी हैं।

  • किसी भी शास्त्र का ज्ञान स्वयं पढ़कर के नहीं हो सकता। बल्कि; गुरूमुख से ही प्राप्त होता है।

  • माता पिता की आज्ञा का सहर्ष पालन करना ही उनकी सच्ची सेवा है।

  • सत्संग के अभाव और कुसंग के प्रभाव से ही, जीवन में दोषों का आविर्भाव होता है।

  • बीते पल लौटकर कभी वापस नहीं आते, पर; उनकी यादें सदा साथ रहती हैं।

  • भीतर के क्रोध को नहीं, बोध को जगाओ, तभी सच्चा जागना है। वरना, सुबह उठने पर आँख तो सभी खोलते हैं।

  • अनुभव बाहर से प्राप्त होता है परन्तु अनुभूति भीतर की वस्तु है और भगवान् अनुभव का नहीं, अनुभूति का विषय है।

  • मेरे लिए इस बात का महत्व नहीं है कि ईश्वर हमारे पक्ष में है या नहीं, मेरे लिए अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मैं ईश्वर के पक्ष में रहूं, क्योंकि ईश्वर सदैव सही होता है।

  • जीवन में वापस देखो, तो अनुभव होगा। आगे देखो, आशा चारों ओर देखिए और परमात्मा सत्य और आत्म विश्वास के लिए अपने भीतर देखने के लिए।

भजन

  • चिंता करें
  • परम पीता से प्यार नहीं
  • माँ कुसुम सी कोमलता तुझमें
  • मोहन हमारे
  • जब तक साँसे चलती हैं
  • मुरलीधरा